navbharat-times

विचारों से जुड़े आपकी सेहत के तार

अनेक यत्न करने के बावजूद जाने-अनजाने, चाहे-अनचाहे नकारात्मक विचार दिमाग के किसी कोने से निकलकर परेशान कर ही देते हैं। कोई भी इससे बच नहीं पाता।
आज के समय में देखें तो प्रत्येक व्यक्ति व्यर्थ की प्रतिस्पर्धा, तनाव, कभी न खत्म होने वाली भागदौड को साथ में लेकर परेशान है – हैरान है और दूसरी ओर देखो तो जरा? शांति बेचारी, इस भीड़ में कहीं गुम हो गई है। आज यदि एक एक घर में जाकर एकाद परिवार को ढूंढ़ने निकलें कि जहां आरोग्य देव का वरद हस्त सब के सिर पर हो, शायद हम ढूंढ़ते ही रह जाएंगे। शायद ‘प्रथम सुख निरोगी काया’ यह सूत्र सब भूल ही गए हैं।
देखिये न! किसी भी होटेल, रेस्टोरन्ट, अन्य खाने-पीने के आउटलेट्स देखें तो सब जगह भीड़ मिलती है; किसी भी होस्पिटल या क्लिनिक में जाएं तो आप का नंबर आते आते घंटों लग जाते हैं! बताइए स्वस्थ कौन? सुखी कौन? आनंदमय कौन?
अब ज़रा बताइए, तनाव होता क्यों हे? पारिवारिक वातावरण कुछ ऐसा होता है कि किसी को तनाव मिल सकता है, बचपन में स्नेह-प्यार का अभाव होता है, इर्ष्या द्वेष की भावना घर कर जाती है, अत्यधिक अंतर्मुखी होने से दिल कई बातों का बोज लिए घूमता है, एकाद असफलता मिलने पर निराश हो जाना आदि नकारात्मक सोच की निशानी है और इसका अंत एक ही है – तनाव।
चलिए एक छोटी सी लघुकथा सुनाती हूँ। एक राजा थे। उनके तीन पुत्र थे। उनका राज्य सुखी था और रानियां भी बहुत खुबसुरत थी। समय चलते राजा को चिंता होने लगी कि मेरे बाद मेरे राज्य का क्या होगा? मेरी रानियों और मेरे राजकुमारों का क्या होगा? इसी सोच के कारण राजा की निंद हराम हो गई थी। वे मखमल की गद्दी पर सो नहीं पा रहे थे। उन्हें छप्पन भोग का स्वाद अच्छा नहीं लग रहा था। वे गुमसुम रहने लगे। कमज़ोरी ने उन्हें जकड़ लिया। राज वैद आए, अन्य राज्यों से वैद्यों-हकिमों को बुलाया गया, कोई भी राजा का मर्ज पकड़ नहीं पाए। सब परेशान हो गए।

ऐसे में एक संत महात्मा पधारे। उनका स्वागत किया गया। सबके उदास चेहरे को देखकर संत ने कारण पूछा। वे ज्ञानी थे। वे समझ गए कि परेशानी क्या है। उन्होंने कहा कि राज्य में सबसे सुखी व्यक्ति का वस्त्र यदि इस राजा को पहनाया जाएगा तो रोग का उपचार संभव हो पाएगा। बस, फिर क्या था? सैनिकों की टुकडियां निकल पड़ी। घर घर जाकर सुखी व्यक्ति की खोज करना शुरु किया, परंतु व्यर्थ। अंत में, एक गरीब किसान था जो अपने खेत में बैठा हुआ ज़ोर ज़ोर से गीत गा रहा था। सैनिक समझ गये कि इससे सुखी व्यक्ति और कोई नहीं हो सकता। उसे दरबार में लाया गया। पूछा कि क्या तुम सुखी हो? उसने जवाब दिया हां बिलकुल मैं बहुत सुखी हूं। जब उसका कारण पूछा तो जवाब में वह बोला, ‘मेरे पास जो है वह सब प्रभु का दिया है, मैं सुबह-शाम प्रभु को धन्यवाद देता हूँ, मैं किसीका बुरा नहीं सोचता, मेरे पास जो है उसमें खुश हूं।’
जब राजा उससे मिले तो उसे समझ आया कि उसके पास पूरा राज्य, भरापूरा परिवार, सक्षम और बहादुर राजकुमार, सुंदर महारानियां और अखूट खज़ाना है फिर भी वह परेशान है वह केवल भविष्य की चिंता को लेकर। अब राजा ने चिंता को त्याग दिया और सुखी जीवन जीने लगा।
कहते हैं न, सोच और स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक हैं। सकारात्मक सोच का अर्थ है आशावादी मनोद्रष्टि अर्थात किसी भी परिस्थिति में अच्छा सोचना। इसका अर्थ यह भी नहीं है कि समस्या को हल्के में लेना, परंतु समस्या का समाधान निकालने के लिए फोकस्ड रहना चाहिए।
क्या करना चाहिए?
बस मुस्कुरा दो

अध्ययनों के द्वारा पाया गया है कि एक सकारात्मक दृष्टिकोण कई स्थितियों में परिणामों और जीवन संतुष्टि में सुधार करता है। कुछ अध्ययनकर्ता कहते हैं कि कुछ विपरीत परिस्थिति में नकली मुस्कुराहट भी हृदयगति को और रक्तचाप को कम करता है।
विचार को रीफ्रेम करो
यदि आप ट्राफिक जाम में फंस गए हों तो स्टीयरिंग पर हाथ मार मार कर चोट लगा देने की बजाय यह सोचना चाहिए कि आपके पास कार है इसलिए ट्राफिक जाम में आप आज फंसे हैं वरना…
लचीलापन रखें
लचीलापन अर्थात किसी भी विपरीत परिस्थिति में अपना आपा खोने की बजाय, परिवार एवं दोस्तों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखें, परिवर्तन जीवन का हिस्सा है इस बात को स्वीकार करें, समस्या का समाधान निकालने के लिए योग्य समय का इंतेजार करने की बजाय उस पर कार्य शुरु करें।
हंसमुख रहीए
यदि हमारी सोच सकारात्मक है तो हम चीज़ों के नकारात्मक पक्ष को भी सकारात्मक बनाने में सफल होते हैं। हमारा मूड खुशनुमा हो जाता है और जीवन और भी आनंदमय हो जाता है।
खुशी का स्रोत
सकारात्मक सोच के कारण हमारी परिस्थिति आसपास रहनेवाले लोगों के लिए खुशी का जरिया बन जाती है।
अनावश्यक विषयों से मन को हटाना
सकारात्मक सोच को यदि हम महत्व देते हैं तो जिन विचारों से हमारे मन में तनाव होता है वे विचार दूर चले जाते हैं और हम तनावग्रस्त नहीं होते।
प्रभावशाली व्यक्तित्व
सकारात्मक सोच के धनी व्यक्ति का व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है। ऐसे व्यक्ति चारों ओर अपनी अच्छी छाप छोड़ते हैं। लोग उनके सकारात्मक विचारों की सराहना करते हैं।
क्या होता है सकारात्मकता से
परिस्थितियों से निपटने की शक्ति
सकारात्मक सोच इंसान की उम्मीदों को टूटने नहीं देती इसलिए इंसान चाहे किसी भी परिस्थिति में फंस जाए तो भी कभी हार नहीं मानता और वह दुगनी शक्ति से लड़कर जीत हांसिल करता है।
लंबी आयु

जिन लोगों के परिवार में हृदयरोग का इतिहास है लेकिन सकारात्मक सोचते हैं तो उन्हें दिलका दौरा या किसी अन्य हृदयरोग होने की संभावना एक तिहाई कम होती है और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
इम्युनिटी बढ़ाती है
अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत रखने के प्रमुख तरीकों में एक है सकारात्मक सोच। जब आप सकारात्मक सोचते हैं तो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक से काम करती है और सभी बीमारियों से लड़ती है, और इस बात का समर्थन विज्ञान भी करता है।
रक्तचाप नियंत्रित रखती है
उच्च रक्तचाप के प्रमुख कारणों में एक है अधिक तनाव। यदि हम सकारात्मक सोचें और इससे हमारा तनाव कम हो तो रक्तचाप नियंत्रित हो जाता है।
बेहतर स्वास्थ्य
सकारात्मक सोच न केवल तनाव और आपकी प्रतिरक्षा से निपटने की आपकी क्षमता को प्रभावित कर सकती है बल्कि इसका आपके समग्र स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है, जिस में हृदय संबंधित समस्याओं से मृत्यु का जोखिम कम हो जाता है, इससे डीप्रेशन भी कम होता है और अन्य बड़ी बीमारियां नहीं होती। परिणामस्वरुप लंबा स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
तो चलिए, आज विचार बदलेंगे और सेहत को बदलती देखेंगे…
Vrunda Manjeet
9825444891
vrinda.one@gmail.com

Main Menu